6वाँ भाव: रोग, ऋण और शत्रु
कुंडली का 6वाँ भाव रोग, ऋण और शत्रु का भाव है: रोज़ का काम, सेहत की आदतें, कर्ज़, प्रतिद्वंद्वी और सेवा।
षष्ठ भाव को रोग, ऋण और सेवा का भाव कहा जाता है। यह भाव हमें सिखाता है कि अनुशासन और संयम से कैसे स्वस्थ रहा जाए। जीवन में आने वाली कठिनाइयों और रोगों से लड़ने की शक्ति यहीं से मिलती है। नियमित दिनचर्या और दूसरों की सेवा से हर बाधा दूर हो जाती है।
किनका कारक
- दैनिक दिनचर्या, श्रम, सेवा और स्वास्थ्य की रक्षा का भाव
- ऋण, बाधाओं और विरोधियों पर विजय पाने की क्षमता
- निःस्वार्थ जनसेवा, स्वच्छता और पशु-पक्षियों की देखभाल
- मुसीबतों से जूझने का आत्मबल और व्यावहारिक अनुशासन
- पाचन क्रिया, रोग प्रतिरोधक क्षमता और नियमित दिनचर्या
रोज़ के जीवन में
नियमित दिनचर्या का पालन करें, समय पर ऋण चुकाएं, सादा भोजन करें और जरूरतमंदों व बेजुबानों की सेवा करें।
इस भाव में ग्रह
सूर्य · चन्द्र · मंगल · बुध · गुरु · शुक्र · शनि · राहु · केतु