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6वाँ भाव: रोग, ऋण और शत्रु

कुंडली का 6वाँ भाव रोग, ऋण और शत्रु का भाव है: रोज़ का काम, सेहत की आदतें, कर्ज़, प्रतिद्वंद्वी और सेवा।

षष्ठ भाव को रोग, ऋण और सेवा का भाव कहा जाता है। यह भाव हमें सिखाता है कि अनुशासन और संयम से कैसे स्वस्थ रहा जाए। जीवन में आने वाली कठिनाइयों और रोगों से लड़ने की शक्ति यहीं से मिलती है। नियमित दिनचर्या और दूसरों की सेवा से हर बाधा दूर हो जाती है।

किनका कारक

रोज़ के जीवन में

नियमित दिनचर्या का पालन करें, समय पर ऋण चुकाएं, सादा भोजन करें और जरूरतमंदों व बेजुबानों की सेवा करें।

इस भाव में ग्रह

सूर्य · चन्द्र · मंगल · बुध · गुरु · शुक्र · शनि · राहु · केतु

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