3वाँ भाव: पराक्रम और भाई-बहन
कुंडली का 3वाँ भाव पराक्रम और भाई-बहन का भाव है: मेहनत, भाई-बहन, छोटी यात्राएँ, लेखन और बातचीत।
तृतीय भाव को पराक्रम या सहज भाव कहते हैं। यह मनुष्य की अपनी मेहनत, हिम्मत और छोटे भाई-बहनों से संबंधों को दर्शाता है। यह भाव सिखाता है कि भाग्य के भरोसे बैठने के बजाय अपने हाथों से पुरुषार्थ करना चाहिए। परिश्रम और साहस से हर लक्ष्य को पाया जा सकता है।
किनका कारक
- साहस, पराक्रम, पुरुषार्थ और स्वयं के परिश्रम का भाव
- छोटे भाई-बहन, निकट पड़ोसी और बाल सखाओं का संबंध
- हाथों का कौशल, लेखन, कला और तकनीकी कार्य
- लघु यात्राएं, दैनिक आवागमन और संचार व्यवस्था
- दृढ़ इच्छाशक्ति, खेलकूद और शारीरिक चुस्ती का प्रतीक
रोज़ के जीवन में
छोटे भाई-बहनों का सहयोग करें, अपने हाथों से उपयोगी काम सीखें, नियमित टहलें और आत्मविश्वास से काम करें।
इस भाव में ग्रह
सूर्य · चन्द्र · मंगल · बुध · गुरु · शुक्र · शनि · राहु · केतु