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गुरु

गुरु ज्ञान, गुरु, संतान, धन, श्रद्धा का कारक है। उच्च राशि कर्क, नीच राशि मकर। इसकी महादशा 19 वर्ष की होती है।

बृहस्पति देव को देवगुरु माना गया है। वे अज्ञान के अंधकार को मिटाकर जीवन में ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। गुरु की दृष्टि अमृतमयी मानी जाती है, जो व्यक्ति को सदाचारी, धैर्यवान और उदार बनाती है। वे सिखाते हैं कि सच्चा धन ज्ञान और परोपकार ही है।

किनका कारक

रोज़ के जीवन में

गुरुजनों और बड़ों का नित्य चरण स्पर्श करें, विद्यार्थियों को ज्ञान दें, धर्म का आचरण करें और मन में सबके कल्याण का भाव रखें।

मंत्र

ॐ बृहस्पतये नमः

हर भाव में गुरु

भाव 1 · भाव 2 · भाव 3 · भाव 4 · भाव 5 · भाव 6 · भाव 7 · भाव 8 · भाव 9 · भाव 10 · भाव 11 · भाव 12

हर राशि में गुरु

मेष · वृषभ · मिथुन · कर्क · सिंह · कन्या · तुला · वृश्चिक · धनु · मकर · कुम्भ · मीन

बलवान हो तोउन्नति, सही मार्गदर्शन और सौभाग्य
कमज़ोर हो तोअति-आत्मविश्वास या अति
स्वराशिधनु, मीन
उच्चकर्क
नीचमकर
वारगुरुवार
दशा वर्ष19
जिन नक्षत्रों का स्वामीपुनर्वसु, विशाखा, पूर्वभाद्रपदा