पुनर्वसु नक्षत्र
पुनर्वसु 27 में से 7वाँ नक्षत्र है, स्वामी गुरु, राशि मिथुन और कर्क। नाम अक्षर: के को हा ही।
प्रकाश की पुनः वापसी अथवा शुभ वास. देवता: अदिति, देवमाता · प्रतीक: धनुष और तरकश · पशु: बिल्ली · गण: देव
स्वभाव
- उदार हृदय और क्षमाशील स्वभाव
- आशावादी सोच जो कल पर भरोसा रखती है
- सरल और सात्विक जीवन में संतोष
- असफलताओं से संभलकर पुनः उठने की शक्ति
- ज्ञान और अध्यात्म में गहरी रुचि
उपयुक्त काम
- शिक्षण, विद्यादान और संस्थान प्रबंधन
- साहित्य, प्रकाशन और नीतिशास्त्र
- भवन निर्माण, गृह सज्जा और सेवा
कथा
पुनर्वसु नक्षत्र की देवी अदिति हैं, जिन्हें सभी देवों की माता कहा गया है। माता अदिति का हृदय असीम है, जो हर संकट में अपनी संतानों को आश्रय देती हैं। तरकश में रखे तीर यह बताते हैं कि यदि एक प्रयास में सफलता न मिले, तो दूसरा अवसर अवश्य मिलता है। जैसे रात के बाद सुबह का सूरज फिर निकलता है, वैसे ही पुनर्वसु निराशा के बाद नई आशा लाता है। यह नक्षत्र मनुष्य को धैर्य, क्षमा और फिर से नई शुरुआत करने का आशीर्वाद देता है।