DeepDharmaधर्म का दीप Englishऐप खोलें

द्वितीय भाव में गुरु

जब गुरु द्वितीय भाव में स्थित होते हैं, तब वे आपके जीवन में सद्बुद्धि, आध्यात्मिक मार्गदर्शन, उदारता और कृपा का संचार करते हैं और संचित धन, सत्य वाणी, पारिवारिक संबंध और सात्विक खानपान को प्रभावित करते हैं। भृगु सूत्र के अनुसार यह स्थिति वाणी, कुल के संस्कारों और धन की बचत पर विशेष प्रभाव डालती है। आप दैनिक व्यवहार में उदार दृष्टिकोण, सदाचार और सकारात्मक सोच प्रकट करते हैं। परंपरा सिखाती है कि संयम और सकारात्मक सोच के साथ काम करने से यह स्थिति अत्यंत सुखद और कल्याणकारी बनती है।

शक्तियाँ

इनका ध्यान रखें

एक सरल अभ्यास

गुरुजनों का नित्य चरण स्पर्श करें, विद्यार्थियों को पुस्तकें दें और शांत मन से ईश्वर का ध्यान करें।

शास्त्रीय विचार पर आधारित, सरल शब्दों में नए सिरे से लिखा। कुंडली हमेशा पूरी देखी जाती है; एक स्थिति पूरी कहानी नहीं होती।

2वें भाव के बारे में → · गुरु →