पूर्वभाद्रपदा नक्षत्र
पूर्वभाद्रपदा 27 में से 25वाँ नक्षत्र है, स्वामी गुरु, राशि कुम्भ और मीन। नाम अक्षर: से सो दा दी।
पूर्व के शुभ चरण अथवा पावन पग. देवता: अज एकपाद, एक पैर पर स्थित दिव्य ऊर्जा · प्रतीक: तख्त के आगे के पाए अथवा दो मुख वाला पुरुष · पशु: सिंह · गण: मनुष्य
स्वभाव
- अध्यात्म और दर्शनशास्त्र के प्रति गहरा झुकाव
- कठिन साधना और आत्म-अनुशासन का साहस
- संसार और आत्मज्ञान दोनों को समझने की क्षमता
- सत्य और ज्ञान के कार्यों में उदारता से सहयोग
- दृढ़ नैतिक सिद्धांत जिन पर समझौता न हो
उपयुक्त काम
- दर्शनशास्त्र, उच्च शिक्षण और शोध कार्य
- गणित, खगोल विज्ञान और गहन शास्त्र चिंतन
- सामाजिक सुधार, वैचारिक लेखन और उपदेश
कथा
पूर्वभाद्रपदा के अधिपति देव 'अज एकपाद' हैं, जो एकाग्र तपस्या और अचल संकल्प के प्रतीक हैं। दो मुखों का प्रतीक यह बताता है कि मनुष्य को बाहरी कर्तव्यों को निभाते हुए भीतर के सत्य को भी पहचानना चाहिए। जैसे तपस्या से मन के विकार दूर हो जाते हैं, वैसे ही यह नक्षत्र सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। प्राचीन मान्यता है कि इस नक्षत्र में जन्मे लोग स्पष्टवादी, गंभीर और उच्च आदर्शों के प्रति समर्पित होते हैं।