विशाखा नक्षत्र
विशाखा 27 में से 16वाँ नक्षत्र है, स्वामी गुरु, राशि तुला और वृश्चिक। नाम अक्षर: ती तू ते तो।
दो शाखाओं वाली अथवा लक्ष्योन्मुखी. देवता: इंद्र और अग्नि, साहस और संकल्प के देव · प्रतीक: तोरण द्वार अथवा कुम्हार का चाक · पशु: बाघ · गण: राक्षस
स्वभाव
- लक्ष्य तय करने के बाद एकाग्र साधना
- कठिन से कठिन कार्य पूरा करने का उत्साह
- स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और आगे बढ़ने की लगन
- सत्य और विजय की गहरी चाह
- लोगों को प्रेरित करने वाली प्रभावशाली वाणी
उपयुक्त काम
- वकालत, न्याय और वैधानिक वाद-विवाद
- राजनीति, नेतृत्व और लोक प्रशासन
- उद्योग, खेलकूद और निर्माण कार्य
कथा
विशाखा नक्षत्र के देवता इंद्र और अग्नि दोनों हैं। इंद्र देव विजय के प्रतीक हैं और अग्नि देव संकल्प की ज्वाला हैं। दोनों का मिलन अदम्य इच्छाशक्ति और लगन को दर्शाता है। तोरण द्वार उस विजय का प्रतीक है जो कठिन परिश्रम के बाद प्राप्त होती है। विशाखा सिखाती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मन में उत्साह की अग्नि जलती रहे, तो कोई भी रुकावट मार्ग नहीं रोक सकती। यह नक्षत्र व्यक्ति को धैर्य और परिश्रम से महान लक्ष्य प्राप्त करने की शक्ति देता है।