धनु राशि
धनु (Sagittarius) वैदिक राशिचक्र की 9वीं राशि है। तत्व: अग्नि। स्वभाव: द्विस्वभाव। स्वामी ग्रह: गुरु।
धनु राशि उच्च आदर्शों, ज्ञान और धार्मिक आस्था की प्रतीक है। देवगुरु बृहस्पति इसके स्वामी हैं, जिससे इसमें सदा आशा और सच्चाई का भाव रहता है। धनु के जातक खुले विचारों वाले, परोपकारी और सत्यवादी होते हैं। वे ज्ञान की खोज में सदा तत्पर रहते हैं और सबको आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
किनका कारक
- राशि चक्र की नौवीं राशि, द्विस्वभाव अग्नि तत्व
- गुरु इसके स्वामी हैं, जो ज्ञान, धर्म और आशावाद के कारक हैं
- जंघाएं और लक्ष्य की ओर बढ़ने वाले कदमों का प्रतिनिधित्व
- उच्च शिक्षा, दर्शनशास्त्र और तीर्थ यात्राओं में रुचि
- उदार सोच, सत्यनिष्ठा और सबको प्रेरित करने का स्वभाव
रोज़ के जीवन में
सदा सत्य और आशावादी बातें करें, गुरुओं का सम्मान करें, विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करें और धर्म के मार्ग पर चलें।
मंत्र
ॐ बृहस्पतये नमःलग्न के रूप में
धनु लग्न: प्रसन्न, ईमानदार और साहसी। आपको सीखना, यात्रा और बड़े विचार पसंद हैं।
चंद्र राशि के रूप में
धनु राशि में चन्द्रमा: आशावादी और आज़ादी पसंद; जीवन में अर्थ चाहिए।
| स्वामी | गुरु |
|---|---|
| तत्व | अग्नि |
| स्वभाव | द्विस्वभाव |
| नक्षत्र | मूल, पूर्वाषाढा, उत्तराषाढा |
लोग पूछते हैं
धनु राशि का स्वामी कौन है?
गुरु।
धनु राशि में कौन से नक्षत्र आते हैं?
मूल, पूर्वाषाढा, उत्तराषाढा.