उत्तराषाढा नक्षत्र
उत्तराषाढा 27 में से 21वाँ नक्षत्र है, स्वामी सूर्य, राशि धनु और मकर। नाम अक्षर: भे भो जा जी।
स्थायी विजय अथवा बाद की अपराजिता. देवता: विश्वेदेव, समस्त श्रेष्ठ गुणों के देव · प्रतीक: हाथी का दांत अथवा छोटा तख्त · पशु: नेवला · गण: मनुष्य
स्वभाव
- सत्यनिष्ठा जिससे अपने आप सम्मान प्राप्त हो
- लंबे कार्यों को धैर्यपूर्वक पूरा करने का नियम
- न्याय, मर्यादा और कर्तव्य के प्रति समर्पण
- बड़ी उपलब्धियों के बाद भी स्वभाव में विनम्रता
- सबको साथ लेकर चलने और जोड़ने की क्षमता
उपयुक्त काम
- न्यायपालिका, लोक सेवा और प्रशासनिक दायित्व
- वास्तु निर्माण, बड़े भवन और सामाजिक योजनाएं
- नीति निर्धारण, शिक्षण संस्थान और जनहित कार्य
कथा
उत्तराषाढा नक्षत्र के देवता विश्वेदेव हैं, जो सत्य, धैर्य, दया और न्याय जैसे दस दिव्य गुणों के प्रतीक हैं। हाथी का दांत अटूट बल और गरिमा को दर्शाता है। जैसे हाथी धीर-गंभीर चाल से बिना रुके अपनी राह पर बढ़ता है, वैसे ही इस नक्षत्र की विजय सदा स्थिर रहती है क्योंकि वह सच्चाई की नींव पर खड़ी होती है। प्राचीन मान्यता है कि उत्तराषाढा व्यक्ति को निष्ठावान, सम्मानित और जनहितकारी बनाता है, जिसका यश समय के साथ बढ़ता है।