वृश्चिक राशि
वृश्चिक (Scorpio) वैदिक राशिचक्र की 8वीं राशि है। तत्व: जल। स्वभाव: स्थिर। स्वामी ग्रह: मंगल।
वृश्चिक राशि गहराई, रहस्य और अडिग संकल्प की प्रतीक है। इसके स्वामी मंगल होने के कारण इसमें असीम आंतरिक शक्ति होती है। वृश्चिक के जातक गंभीर, वफादार और सच्चाई के खोजी होते हैं। वे कठिन से कठिन समय में भी विचलित नहीं होते और अपने सिद्धांतों पर डटे रहते हैं।
किनका कारक
- राशि चक्र की आठवीं राशि, स्थिर जल तत्व
- मंगल इसके स्वामी हैं, जो आंतरिक बल और दृढ़ निश्चय के प्रतीक हैं
- गूढ़ ऊर्जा, सहनशक्ति और आत्म-परिवर्तन का प्रतिनिधित्व
- सच्चाई की खोज, अगाध निष्ठा और गंभीर चिंतन का स्वभाव
- विपत्तियों का सामना करके निखरने की अद्भुत क्षमता
रोज़ के जीवन में
मन की बातों को शांत रहकर संभालें, पुरानी कड़वाहटों को भुलाकर क्षमा करें, संयमित रहें और अपने ज्ञान को बढ़ाएं।
मंत्र
ॐ भौमाय नमःलग्न के रूप में
वृश्चिक लग्न: गहरे, अपनी बातें अपने तक रखने वाले और दृढ़ निश्चयी। आप हर बात को गहराई से महसूस करते हैं और आसानी से हार नहीं मानते।
चंद्र राशि के रूप में
वृश्चिक राशि में चन्द्रमा: गहरी और निजी भावनाएँ; एक बार भरोसा हो जाए तो बहुत वफ़ादार।
लोग पूछते हैं
वृश्चिक राशि का स्वामी कौन है?
मंगल।
वृश्चिक राशि में कौन से नक्षत्र आते हैं?
विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा.