तुला राशि
तुला (Libra) वैदिक राशिचक्र की 7वीं राशि है। तत्व: वायु। स्वभाव: चर। स्वामी ग्रह: शुक्र।
तुला राशि संतुलन, न्याय और मधुर संबंधों की प्रतीक है। शुक्र इसके स्वामी हैं, जिससे इसमें सौंदर्य और शांति प्रियता कूट-कूट कर भरी होती है। तुला के जातक बहुत विनम्र, न्यायप्रिय और व्यवहारकुशल होते हैं। वे विवादों को सुलझाने और सबको साथ लेकर चलने में माहिर होते हैं।
किनका कारक
- राशि चक्र की सातवीं राशि, चर वायु तत्व
- शुक्र इसके स्वामी हैं, जो संतुलन, न्याय और सौंदर्य के प्रतीक हैं
- कमर का निचला भाग, गुर्दे और शारीरिक संतुलन का प्रतिनिधित्व
- शिष्ट व्यवहार, सामंजस्य और साझेदारी को महत्व देना
- सभी पक्षों को सुनकर निष्पक्ष निर्णय लेने का गुण
रोज़ के जीवन में
किसी भी निर्णय से पहले दोनों पक्षों को समझें, घर में शांति और सुंदरता बनाए रखें, मधुर बोलें और निष्पक्ष रहें।
मंत्र
ॐ शुक्राय नमःलग्न के रूप में
तुला लग्न: विनम्र, न्यायप्रिय और मिलनसार। आप सन्तुलन और अच्छे रिश्ते चाहते हैं; निर्णय लेने में समय लग सकता है।
चंद्र राशि के रूप में
तुला राशि में चन्द्रमा: मेल-जोल और साथ चाहिए; झगड़ा पसंद नहीं।
लोग पूछते हैं
तुला राशि का स्वामी कौन है?
शुक्र।
तुला राशि में कौन से नक्षत्र आते हैं?
चित्रा, स्वाती, विशाखा.