धनिष्ठा नक्षत्र
धनिष्ठा 27 में से 23वाँ नक्षत्र है, स्वामी मंगल, राशि मकर और कुम्भ। नाम अक्षर: गा गी गू गे।
सबसे समृद्ध अथवा मधुर ताल. देवता: अष्ट वसु, प्रकृति और ऐश्वर्य के देव · प्रतीक: मृदंग (ढोलक) अथवा बांसुरी · पशु: सिंहनी · गण: राक्षस
स्वभाव
- संगीत, लय और काव्य की स्वाभाविक समझ
- उदारता और अपनी समृद्धि को बांटने का भाव
- कठिनाइयों में भी मुस्कराते रहने का हौसला
- खेलकूद, नृत्य और सामूहिक उत्सवों में रुचि
- बड़ी टीमों को तालमेल के साथ चलाने का हुनर
उपयुक्त काम
- संगीत, वाद्यवादन और मंच कलाएं
- खेल प्रशिक्षण, व्यायाम और कार्यक्रम आयोजन
- संपत्ति प्रबंधन, वित्त और वाणिज्यिक कार्य
कथा
धनिष्ठा नक्षत्र के देवता आठों वसु हैं, जो पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, सूर्य, चन्द्र और तारों के अधिपति हैं। मृदंग का प्रतीक जीवन की सुंदर लय को दर्शाता है। जैसे ढोलक की थाप से वातावरण में उत्साह भर जाता है, वैसे ही धनिष्ठा नक्षत्र समृद्धि और आनंद का संचार करता है। प्राचीन मान्यता है कि धनिष्ठा नक्षत्र में जन्मे लोग अनुशासन और परिश्रम से यश प्राप्त करते हैं और अपने साथ-साथ पूरे परिवार व समाज का कल्याण करते हैं।