मंगल
मंगल ऊर्जा, साहस, भूमि-संपत्ति, भाई-बहन, खेल का कारक है। उच्च राशि मकर, नीच राशि कर्क। इसकी महादशा 16 वर्ष की होती है।
मंगल देव को नवग्रहों का सेनापति माना गया है। वे शौर्य, कर्तव्यनिष्ठा और विपत्तियों से जूझने के अदम्य साहस के प्रतीक हैं। मंगल की ऊर्जा मनुष्य को आलस्य छोड़कर कर्म करने, कठिनाइयों का सामना करने और सत्य की रक्षा के लिए तत्पर रहने की प्रेरणा देती है।
किनका कारक
- शारीरिक ऊर्जा, साहस और पराक्रम का स्वामी
- छोटे भाइयों, साथियों और सहयोगियों का प्रतिनिधि
- भूमि, भवन, निर्माण और तकनीकी उपकरणों का नियंत्रक
- कमजोरों की रक्षा और न्याय के लिए लड़ने की शक्ति
- अनुशासन, खेल भावना और अडिग संकल्प का प्रतीक
रोज़ के जीवन में
नियमित व्यायाम करें, छोटे भाई-बहनों का सहयोग करें, क्रोध पर संयम रखें और अपने साहस का उपयोग दूसरों की भलाई में करें।
मंत्र
ॐ भौमाय नमःहर भाव में मंगल
भाव 1 · भाव 2 · भाव 3 · भाव 4 · भाव 5 · भाव 6 · भाव 7 · भाव 8 · भाव 9 · भाव 10 · भाव 11 · भाव 12
हर राशि में मंगल
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