चित्रा नक्षत्र
चित्रा 27 में से 14वाँ नक्षत्र है, स्वामी मंगल, राशि कन्या और तुला। नाम अक्षर: पे पो रा री।
चमकीला रत्न अथवा मनमोहक चित्र. देवता: त्वष्टा, देवों के दिव्य शिल्पकार · प्रतीक: चमकता हुआ मोती अथवा रत्न · पशु: बाघ · गण: राक्षस
स्वभाव
- सुंदर रचना, समरूपता और सुरुचि की समझ
- नई वस्तुएं गढ़ने की मौलिक बुद्धि
- आकर्षक व्यक्तित्व और सुरुचिपूर्ण पहनावा
- अपनी कला और मौलिकता पर अडिग रहना
- हर कार्य को भव्य और सुंदर बनाने की लगन
उपयुक्त काम
- वास्तुकला, भवन निर्माण और नगर नियोजन
- आभूषण निर्माण, वस्त्र सज्जा और चित्रकारी
- यांत्रिक अभियांत्रिकी, मूर्तिकला और रूपरेखा निर्माण
कथा
चित्रा नक्षत्र के देवता त्वष्टा हैं, जिन्होंने देवों के भव्य भवनों और दिव्य रथों का निर्माण किया था। मोती का प्रतीक यह दर्शाता है कि जैसे सीप के भीतर धैर्यपूर्वक अनमोल मोती तैयार होता है, वैसे ही सच्चा सौंदर्य समय और लगन से निखरता है। चित्रा नक्षत्र मनुष्य को अद्भुत रचनात्मकता और सौंदर्य-बोध देता है। प्राचीन मान्यता है कि इस नक्षत्र के प्रभाव से व्यक्ति साधारण चीजों को भी सुंदर कलाकृतियों में बदलने की प्रतिभा रखता है।