DeepDharmaधर्म का दीप Englishऐप खोलें

केतु

केतु वैराग्य, आध्यात्मिकता, पिछले जन्म के गुण, अन्तर्ज्ञान का कारक है। उच्च राशि वृश्चिक, नीच राशि वृषभ। इसकी महादशा 6 वर्ष की होती है।

केतु देव मोक्ष के कारक माने जाते हैं। वे बाहरी दिखावे और भौतिक बंधनों को शिथिल करके मन को ईश्वर और आत्म-चिंतन की ओर मोड़ते हैं। केतु का प्रभाव मनुष्य को अंतर्ज्ञानी, शांत और सांसारिक उतार-चढ़ावों से निर्लिप्त रहने की उच्च आध्यात्मिक दृष्टि प्रदान करता है।

किनका कारक

रोज़ के जीवन में

प्रतिदिन कुछ समय मौन रहकर ध्यान करें, बेजुबान पशुओं और श्वान को रोटी दें, अहंकार का त्याग करें और सेवा भाव से जीवन जिएं।

मंत्र

ॐ केतवे नमः

हर भाव में केतु

भाव 1 · भाव 2 · भाव 3 · भाव 4 · भाव 5 · भाव 6 · भाव 7 · भाव 8 · भाव 9 · भाव 10 · भाव 11 · भाव 12

हर राशि में केतु

मेष · वृषभ · मिथुन · कर्क · सिंह · कन्या · तुला · वृश्चिक · धनु · मकर · कुम्भ · मीन

बलवान हो तोगहरी समझ और मोह छोड़ना
कमज़ोर हो तोबेचैनी या कटा-कटा महसूस करना
स्वराशि—
उच्चवृश्चिक
नीचवृषभ
वार—
दशा वर्ष6
जिन नक्षत्रों का स्वामीअश्विनी, मघा, मूल