केतु
केतु वैराग्य, आध्यात्मिकता, पिछले जन्म के गुण, अन्तर्ज्ञान का कारक है। उच्च राशि वृश्चिक, नीच राशि वृषभ। इसकी महादशा 6 वर्ष की होती है।
केतु देव मोक्ष के कारक माने जाते हैं। वे बाहरी दिखावे और भौतिक बंधनों को शिथिल करके मन को ईश्वर और आत्म-चिंतन की ओर मोड़ते हैं। केतु का प्रभाव मनुष्य को अंतर्ज्ञानी, शांत और सांसारिक उतार-चढ़ावों से निर्लिप्त रहने की उच्च आध्यात्मिक दृष्टि प्रदान करता है।
किनका कारक
- मोक्ष, वैराग्य, अंतर्मुखी चिंतन और आत्मज्ञान का कारक
- सहज अंतःप्रेरणा, गूढ़ ज्ञान और पूर्व संस्कारों का स्वामी
- सूक्ष्म चिकित्सा, योग, ध्यान और सात्विक एकांत का प्रतीक
- सांसारिक मोह-माया और दिखावे से मुक्ति दिलाने वाला
- निःस्वार्थ सेवा और आध्यात्मिक शांति का मार्गदर्शक
रोज़ के जीवन में
प्रतिदिन कुछ समय मौन रहकर ध्यान करें, बेजुबान पशुओं और श्वान को रोटी दें, अहंकार का त्याग करें और सेवा भाव से जीवन जिएं।
मंत्र
ॐ केतवे नमःहर भाव में केतु
भाव 1 · भाव 2 · भाव 3 · भाव 4 · भाव 5 · भाव 6 · भाव 7 · भाव 8 · भाव 9 · भाव 10 · भाव 11 · भाव 12
हर राशि में केतु
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