ज्येष्ठा नक्षत्र
ज्येष्ठा 27 में से 18वाँ नक्षत्र है, स्वामी बुध, राशि वृश्चिक। नाम अक्षर: नो या यी यू।
सबसे बड़ी अथवा प्रधान रक्षक. देवता: इंद्र, देवराज और संरक्षक · प्रतीक: सुरक्षा कवच, ताबीज अथवा छाता · पशु: हिरण · गण: राक्षस
स्वभाव
- छोटे भाई-बहनों और आश्रितों की रक्षा की भावना
- कठिन जिम्मेदारियों को आगे बढ़कर संभालने का साहस
- स्वावलंबन और आत्मसम्मान का गहरा बोध
- भविष्य को भांपने वाली तेज बुद्धि
- कमजोर लोगों के पक्ष में खड़े होने का हौसला
उपयुक्त काम
- सुरक्षा सेवाएं, पुलिस और रक्षा प्रबंधन
- वरिष्ठ प्रशासनिक पद और संगठन प्रमुख
- तकनीकी अनुसंधान, अन्वेषण और परामर्श
कथा
ज्येष्ठा नक्षत्र के स्वामी देवराज इंद्र हैं, जो स्वर्ग के रक्षक माने जाते हैं। इसका प्रतीक छाता है, जो धूप और बारिश से रक्षा करता है। बड़ा होना केवल उम्र का नाम नहीं, बल्कि सबका ध्यान रखने और संकट में ढाल बनकर खड़े होने का दायित्व है। ज्येष्ठा सिखाती है कि सच्चा बड़ा वही है जो अपने पद का घमंड न करे, बल्कि अपनी शक्ति से दूसरों को सुरक्षा और संबल दे। यह नक्षत्र नेतृत्व और उत्तरदायित्व का उत्कृष्ट प्रतीक है।