पुष्य नक्षत्र
पुष्य 27 में से 8वाँ नक्षत्र है, स्वामी शनि, राशि कर्क। नाम अक्षर: हू हे हो डा।
पोषण करने वाला अथवा खिला हुआ फूल. देवता: बृहस्पति, देवगुरु · प्रतीक: गाय का थन, कमल अथवा वृत्त · पशु: भेड़ · गण: देव
स्वभाव
- दूसरों का पोषण और देखभाल करने की भावना
- बड़ों, ज्ञानियों और संस्कारों का आदर
- धैर्यवान और शांत स्वभाव
- भरोसेमंद मित्र जो वचन निभाता है
- निःस्वार्थ सेवा और परोपकार में रुचि
उपयुक्त काम
- शिक्षा, गुरु मार्गदर्शन और अध्यापन
- प्रशासन और सामाजिक कल्याण कार्य
- कृषि, दुग्ध उत्पादन और अन्नक्षेत्र सेवा
कथा
पुष्य को सभी नक्षत्रों में अत्यंत शुभ और कल्याणकारी माना गया है। देवगुरु बृहस्पति इसके अधिपति देव हैं, जो सद्बुद्धि और ज्ञान के प्रदाता हैं। गाय का थन इस बात का प्रतीक है कि जैसे गौमाता बिना किसी भेदभाव के सबको अमृत जैसा दूध देती है, वैसे ही पुष्य सबका पोषण करता है। प्राचीन मान्यता है कि पुष्य नक्षत्र के सान्निध्य में किए गए शुभ कार्य फलदायी होते हैं और मनुष्य को सदाचारी तथा आदरणीय जीवन जीने की शक्ति मिलती है।