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शनि

शनि अनुशासन, मेहनत, धैर्य, बुढ़ापा, सेवा का कारक है। उच्च राशि तुला, नीच राशि मेष। इसकी महादशा 18 वर्ष की होती है।

शनि देव कर्मफल प्रदाता और न्याय के देवता हैं। वे किसी के साथ अन्याय नहीं करते, बल्कि मनुष्य को धैर्य, सादगी और कठिन परिश्रम का महत्व सिखाते हैं। शनि देव का प्रभाव व्यक्ति को तपकर कुंदन की तरह निखारता है और भीतर से विनम्र व मजबूत बनाता है।

किनका कारक

रोज़ के जीवन में

परिश्रम से कभी न घबराएं, श्रमिकों और सफाईकर्मियों का सम्मान करें, वृद्धजनों की सेवा करें और सदा सत्य के मार्ग पर चलें।

मंत्र

ॐ शनैश्चराय नमः

हर भाव में शनि

भाव 1 · भाव 2 · भाव 3 · भाव 4 · भाव 5 · भाव 6 · भाव 7 · भाव 8 · भाव 9 · भाव 10 · भाव 11 · भाव 12

हर राशि में शनि

मेष · वृषभ · मिथुन · कर्क · सिंह · कन्या · तुला · वृश्चिक · धनु · मकर · कुम्भ · मीन

बलवान हो तोसहनशक्ति और मेहनत से टिकाऊ फल
कमज़ोर हो तोदेरी, अकेलापन या दबाव
स्वराशिमकर, कुम्भ
उच्चतुला
नीचमेष
वारशनिवार
दशा वर्ष18
जिन नक्षत्रों का स्वामीपुष्य, अनुराधा, उत्तरभाद्रपदा