शुक्र
शुक्र प्रेम, सौन्दर्य, सुख-सुविधा, कला, विवाह का कारक है। उच्च राशि मीन, नीच राशि कन्या। इसकी महादशा 10 वर्ष की होती है।
शुक्र देव प्रेम, सौंदर्य और कला के अधिपति हैं। वे जीवन को सुंदर, सुरुचिपूर्ण और आनंदमयी बनाने की प्रेरणा देते हैं। शुक्र सिखाते हैं कि दूसरों के प्रति स्नेह, परस्पर सम्मान और कलात्मक दृष्टिकोण से परिवार और समाज में सुख-शांति बनी रहती है।
किनका कारक
- प्रेम, दांपत्य सुख, विवाह और साझेदारी का स्वामी
- कला, संगीत, काव्य और सौंदर्य का मुख्य प्रेरक
- सुख-सुविधा, वाहन, वस्त्र और सुरुचिपूर्ण जीवन का प्रतीक
- संस्कार, कोमलता और जीवनदायिनी विद्या का नियंत्रक
- सद्भाव, शांति स्थापना और मधुर व्यवहार का मार्गदर्शक
रोज़ के जीवन में
घर को स्वच्छ और व्यवस्थित रखें, जीवनसाथी का आदर करें, कला व संगीत का सम्मान करें और मन में सबके प्रति स्नेह रखें।
मंत्र
ॐ शुक्राय नमःहर भाव में शुक्र
भाव 1 · भाव 2 · भाव 3 · भाव 4 · भाव 5 · भाव 6 · भाव 7 · भाव 8 · भाव 9 · भाव 10 · भाव 11 · भाव 12
हर राशि में शुक्र
मेष · वृषभ · मिथुन · कर्क · सिंह · कन्या · तुला · वृश्चिक · धनु · मकर · कुम्भ · मीन
| बलवान हो तो | आकर्षण, आनन्द और तालमेल |
|---|---|
| कमज़ोर हो तो | भोग-विलास या आलस्य |
| स्वराशि | वृषभ, तुला |
| उच्च | मीन |
| नीच | कन्या |
| वार | शुक्रवार |
| दशा वर्ष | 10 |
| जिन नक्षत्रों का स्वामी | भरणी, पूर्वाफाल्गुनी, पूर्वाषाढा |